
कदम जब डगमगाते है मेरे
कुछ सीखने को मिलता है,
दौर है ये अपने पन का
अपना पराया सब समझता है।
बड़ी मुश्किल से ही सही
पर पाया है इक मुकाम को,
इंसान हूं इंसान की
नस – नस को मैं पहचानता हूं।
कवि संगम त्रिपाठी

कदम जब डगमगाते है मेरे
कुछ सीखने को मिलता है,
दौर है ये अपने पन का
अपना पराया सब समझता है।
बड़ी मुश्किल से ही सही
पर पाया है इक मुकाम को,
इंसान हूं इंसान की
नस – नस को मैं पहचानता हूं।
कवि संगम त्रिपाठी
कदम
संकेत साहित्य समिति बिलासपुर इकाई द्वारा काव्य गोष्ठी एवं जन्मोत्सव का आयोजन
धार्मिक अंधविश्वास और पाखंड से बचाता है श्रीरामचरितमानस का अध्ययन।
माँ कालरात्रि
स्वचिंतन
दौलतगंज, स्थित चित्रगुप्त मंदिर परिसर में महिलाओं के लिए राधा कृष्ण प्रतियोगिता आयोजित की गई !
प्राजकता के पौधे या पारिजात का माहात्म्य
मां बूढ़ी दाई मंदिर में सुन्दरकांड, भव्य कवि सम्मेलन और विशाल भंडारे का आयोजन
साहित्यांजलि प्रकाशन प्रयागराज द्वारा समय की लाठी ( कहानी संग्रह ) , अंतिम मुलाकात ( कहानी संग्रह ) चाहे कृष्ण कहो या राम ( कविता संग्रह ) का लोकार्पण सम्पन्न
लेख