Uncategorized
Trending

कदम

कदम जब डगमगाते है मेरे
कुछ सीखने को मिलता है,
दौर है ये अपने पन का
अपना पराया सब समझता है।
बड़ी मुश्किल से ही सही
पर पाया है इक मुकाम को,
इंसान हूं इंसान की
नस – नस को मैं पहचानता हूं।

कवि संगम त्रिपाठी

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *