
सातवीं नवदुर्गा देवी कालरात्रि माँ,
माँ कालरात्रि को माता देवीकाली,
महाकाली, भद्रकाली, भैरवी, रुद्राणी,
चामुंडा, चंडी नामों से जाना जाता है।
रौद्री, धूम्रवर्णा कालरात्रि माँ के
अन्य अनेक प्रसिद्ध नाम भी हैं,
माँ के इस रूप में राक्षस, भूत, प्रेत,
पिशाच आदि ऊर्जा नाश होती हैं।
माँ के आने से ये पलायन करते हैं,
प्राचीन तांत्रिक पाठ सौधिकागम,
में देवी कालरात्रि का वर्णन रात्रि
के नियंत्रा रूप में किया गया है।
करता हूँ अर्चना युगपाणि जोड़कर,
विनती सुनो कालरात्रि माँ आकर,
सप्तम दुर्गा तुम हो माँ कालरात्रि,
पूजा करता हूँ धूप व दीप जलाकर।
या देवी सर्वभतेषु माँ
कालरात्रि रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै,
नमस्तस्यै नमो नम:।
हे माँ सर्वत्र विराजमान हैं और
कालरात्रि रूप में प्रसिद्ध अम्बे को
आदित्य का बारम्बार प्रणाम है,
पाप मुक्ति प्रदान करो जगदम्बे।
डॉ कर्नल आदिशंकर मिश्र
‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’
लखनऊ












