
रामायण केंद्र ,जबलपुर इकाई द्वारा विगत दिवस नर्मदा तट पर उमाघाट (गौरीघाट)में जिज्ञासुओं के धर्म-शंका निवारणार्थ खुले मंच का आयोजन किया गया। रामायण केंद्र के इस कार्यक्रम का मूल उद्देश्य उनके द्वारा सनातन धर्म के अनुयायियों के मध्य में एकता तथा उनके जनजागृति अभियान के अंतर्गत श्रीरामचरितमानस और भगवान श्रीराम से संबंधित विभिन्न शंकाओं , पाखंडों और अंधविश्वास का निवारण करना था । इस परिप्रेक्ष्य में धार्मिक विषयों पर चर्चा एवं खुले मंच से प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया ।
उल्लेखनीय है कि विगत कई वर्षों से गौरीघाट में गरीबों एवं असहाय बच्चों के सर्वांगीण विकास हेतु पराग सर नियमित रुप से 250 बच्चों को निःशुल्क शिक्षा प्रदान करने के महान यज्ञ में अपना योगदान दे रहे हैं। इस परिपेक्ष्य में रामायण केंद्र द्वारा यह प्रयास किया गया कि उन सभी छोटे-छोटे बालक एवं बालिकाओं को भगवान श्रीराम द्वारा स्थापित आदर्शों के बारे में आवश्यक जानकारी देकर उन सभी बच्चों का समुचित मार्गदर्शन किया जाए तथा सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए एवं उन्हें सनातन धर्म की दिशा में आगे बढ़ने के लिए स्वप्रेरित किया जाए । कार्यक्रम के प्रारंभ में रामायण केंद्र के संयोजक इंजी. संतोष कुमार मिश्र “असाधु” एवं रामायण केंद्र जबलपुर इकाई की अध्यक्ष श्रीमती अलका श्रीवास्तव के द्वारा फूल माला तथा श्रीराम-पट्टिका पहनाकर पराग सर का स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। डॉ. नेहा शाक्य के द्वारा इस कार्यक्रम के प्रश्न-मंच का सफल संचालन किया गया। डॉ. नेहा शाक्य नें अपने एक अलग तथा जोशीले अंदाज में बच्चों से रूबरू होते हुए श्रीराम से संबंधित प्रश्नोत्तरी में प्रश्न पूछ कर बच्चों का उत्साहवर्धन किया गया। इस प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम में प्रश्नों के सही उत्तर देने वाले छात्र एवं छात्राओं को रामायण केंद्र जबलपुर द्वारा सांकेतिक उपहार दिये गये ताकि भविष्य में वे श्रीरामचरितमानस एवं रामायण का अध्ययन करके श्रीराम से संबंधित अन्य विविध जानकारी हेतु सदैव उत्सुक बने रहें। इसी अनुक्रम में रामायण केंद्र जबलपुर की अध्यक्ष श्रीमती अलका श्रीवास्तव ने कहा जो मनुष्य कर्मों को अपना कर्तव्य समझ कर उन्हें पूरी ईमानदारी से पूर्ण करतें है वही मनुष्य आगे जाकर सफल होते हैं । कार्यक्रम के अंत में रामायण केंद्र जबलपुर इकाई के संयोजक इंजी संतोष कुमार मिश्र “असाधु “नें कहा कि श्रीरामचरितमानस ग्रंथ समस्त वेद- पुराण, उपनिषदों आदि धार्मिक ग्रंथो का एक अद्भुत निचोड़ हैं। हमें अपने सीमित जीवन में इस ग्रंथ का अध्ययन,चिंतन-मनन और उस पर अमल अवश्य करना चाहिए। धर्म के नाम पर हमारे सनातन समाज में किसी भी प्रकार का कोई अंधविश्वास और पाखंड बिल्कुल भी नहीं होना चाहिए। कार्यक्रम में इंजी अभय एवं अंजलि खरे के साथ-साथ मनोज श्रीवास्तव, श्रीमती अनिला श्रीवास्तव,डॉ सतीश श्रीवास्तव, घनश्याम दास जी शर्मा , शंभू सिंह, मदन मोहन पांडे जी आदि की विशेष उपस्थिति उल्लेखनीय रही।












