
मर्यादा की मूर्ति ,मेरे श्री राम नाम का सार,
सत्य, धर्म की राह पर, मिले प्रभु कृपा अपार ।।
वन-वन भटके फिर भी, मन में न आया द्वेष विचार
जन-जन के हित के लिए ही , त्यागा सुख-संसार ।।
पिता की आज्ञा मानकर, वन को गए श्री सिया राम,
राज तिलक को छोड़कर, निभाया अपना धर्म संस्कार ।।
सीता वियोग के संघर्ष में, लक्ष्मण हुए सहाय
हर संकट में साथ रहे, प्रेम रहे भ्रात निभाए।।
रावण जैसे अधर्मी का, अंत किए प्रभु श्री राम
सत्य की विजय विजय हुई,जग हुआ सुंदर धाम।।
राम नाम भक्ति की शक्ति से, मिट जाते सब पाप,
मन में राम बस जाए यदि,नहीं रहते भयभीत आप ।।
सीख यही श्री राम की — ये जीवन बने उजास,
सत्य, प्रेम, मर्यादा से ही , हरले प्रभु जी हर त्रास।।
©आशी प्रतिभा
मध्य प्रदेश, ग्वालियर













