
एक बात बोलूं साहेब,हम मर्दो को बचपन से ही सिखाया जाता है।
की दर्द छूपाने की हिम्मत रखना बाबू क्योंकि मर्द को दर्द नहीं होता है।।
लेकिन यह बात क्यों नहीं सिखाते हैं कि खुशी भी छूपाने की हिम्मत रखना बाबू।
फिर क्यों मर्द जरा सी खुशी मिलते ही दारू पीकर खुशी से उछलने लगता है।।
चन्दे पासवान उर्फ अलबेला जी मधुबनी बिहार से,













