
कल की चिंता छोड़ मुसाफिर
क्या तूने बनाया यहां ताना है ।
सच्चा सुख तो पास में तेरे
कल तो यहां से उड़ जाना है ।।
दिल पर भार उठाये जग का
आडंबर ढोंग ने भरमाया है ।
कल का मन से बोझ हटा दे
आज का समय न गमाना है ।।
लोलुप चोर उच्चकों का घर
घूसखोरों का आज जमाना है।
ऊपर ,नीचे ,दायें ,बायें आंखो में
आंखो में छिपा रिश्वतखाना है ।।
कैसे सुधरेगा अब यह जग मेरा
संख्या ईमानदारों की थोड़ी है ।
ईमानदारी की खातिर अब तक
बहुत लोगों ने नौकरी छोड़ी है।।
डॉ.कृष्ण कान्त भट्ट
सेन्ट विन्सेंट पल्लोटि कॉलेज बेंगलूरु कर्नाटक













