
जीवन में रामनाम ही सार।
जग है झूठों का बाजार। ।
रोते-रोते जन्म हुआ जब,
हँसता रहा जग सारा।
परिजन गुरुजन यही सिखाते,
धनार्जन ही जीवन प्यारा।।
जग की लीला अपरंपार
जीवन में रामनाम ही सार।।1।।
केवल भौतिकता में हमने,
खो दी जवानी सारी।
झूठे रिश्ते-नातों को हमने,
मानी सच्ची दुनियादारी। ।
जग में मिला न शुभ व्यवहार।
जीवन में रामनाम ही सार।।2।।
खेल-खेल में बचपन बीता,
यौवन पड़ी काम की मार।
जीवन रस संसार बहाया,
अब आया बुढ़ापा बुखार। ।
लुटेरे जगत के रिश्तेदार।
जीवन में रामनाम ही सार।।3।।
अमृतमय मानुष जीवन को,
जगत में वृथा ही हमने गंवाया।
प्रभु भजन ही जीवन धन है,
अंतिम क्षण समझ पाया।।
राम नाम में है चमत्कार।
जीवन में रामनाम ही सार।।4।।
रचयिता-डॉक्टर सत्यनारायण तिवारी हिमांशु महाराज अध्यक्ष,मनियारी साहित्य एवम सेवा समिति लोरमी जिला मुंगेली-छत्तीसगढ 495115











