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गणपति वंदना

सब देवों में प्रथम तुम्हीं हो, सिद्धिविनायक दाता,
विघ्नेश्वर शुभ मंगलकारी, खोलो दया के द्वार।
सबके प्रिय हितकारी स्वामी, संकट हरने वाले,
जय बोलो, जय बोलो, सब मिल गाओ बारंबार।।

भादों शुक्ल चतुर्थी दिन में, प्रकटे गजानन प्यारे,
एकदंत गजवदन विनायक, रूप तुम्हारा न्यारा।
त्रिनयन छवि, विशाल उदर, शोभित अंग सुहावन,
जय बोलो, जय बोलो, गूँजे जग सारा।।

पार्वती के राज दुलारे, शिव शंकर के तारे,
हर्षोल्लास मनाते जग में, नर-नारी सब प्यारे।
गणपति उत्सव मंगलमय है, गूँजे भक्ति धारा,
जय बोलो, जय बोलो, सब मिल गाओ न्यारे।।

सौम्य रूप धर मोदक प्रिय हैं, भोग लगे सुखकारी,
मूषक वाहन चढ़ विराजे, कृपा करें दयाधारी।
धूप दीप आरती सजती, भक्त खड़े द्वारे,
जय बोलो, जय बोलो, महिमा अपरंपारी।।

गणपति सेवा मंगलदायिनी, विघ्न सभी हर लेते,
हाथ जोड़कर भक्त सभी, श्रद्धा सुमन अर्पित करते।
सुरभि विनय कर चरणों में, कृपा दृष्टि बरसाओ,
जय बोलो, जय बोलो, सब मिल नाम जपते।।


डाॅ सुमन मेहरोत्रा’सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार

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