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मुक्तक- प्रदोष व्रत

गौरी शंकर पूज्य हैं,मिले शांति का धाम ।
व्रत प्रदोष का जो करें,बनें तभी सब काम।
रिद्धि -सिद्धि की हो कृपा,भोले बाबा साथ-
सब संकट उनके मिटें , लें व्रत में शिव नाम।

व्रत प्रदोष जिसका रहे , उसका हो उद्धार।
श्रद्धा से जो झुक गया,मिटते सकल विकार ।
त्रयोदशी की साँझ में, व्रत का अद्भुत मान-
शिव शंकर की आरती,खुले भाग्य के द्वार।

व्रत प्रदोष में कीजिए , केवल प्रभु का ध्यान।
जप तप पूजा पाठ से , होता है कल्याण।
मन की अच्छी सोच हो , रखिए नहीं विकार —
शुभ कर्मों से ही मिले , सदा मान सम्मान।


डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार

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