
माननीय प्रधानमंत्री जी,
सादर नमन
माननीय प्रधानमंत्री जी आप हमारे जीवन के सबसे बड़े आदर्श हैं। आप इस धरती के लिए ईश्वरीय वरदान हैं।
” औरों के हित जो जीता है, औरों के हित जो मरता है।
उसका हर आँसू रामायण प्रत्येक कर्म ही गीता है। “
माननीय प्रधानमंत्री जी मैंने आपके जीवन के सफर को एक छोटी सी कविता के माध्यम से कहने का प्रयास किया है यदि गलती की हो तो मेरे इस अक्षम्य अपराध को क्षमा कीजिये।
युगपरिवर्तक की देश को, जाने कब से थी आस।
जन्म लिया फिर मोदी जी ने वडग नगर में,
जिला महेसाना के पास।
माँ हीराबेन, पिता दामोदर दास मूलचंद जी।
17 सितम्बर 1950 दिन वो बहुत था खास।
छ: बच्चों में तीसरे मोदी दामोदर दास।
युग परिवर्तक की देश को, जाने कब से थी आस।
आज्ञाकारी अपने पिता के, मानो राम के खास।
चाय बेचते स्टेशन पर, रहे पिता के हरदम पास।
देश प्रेम था हृदय में, करना चाहते देश हित काम।
RSS से जुड़ने की, थी बचपन से ही आस।
स्वयंसेवक वो बने संघ के, जमकर किया प्रचार।
युग परिवर्तक की देश को, जाने कबसे थी आस।
राष्ट्र निर्माण और अंत्योदय से लेकर,
स्वक्ष भारत मिशन पर किया सफल प्रयास।
जनधन और उज्ज्वला योजना, आत्मनिर्भर भारत अभियान।
धारा 370 हटाया, कैसे कहेँ क्या करके दिखाया।
प्रोधोगिकी के बने समर्थक, युवाओं के सुपर स्टार।
स्वावलंबन का पाठ सिखाया, रहे सबके ह्रदय के पास।
एक युग परिवर्तक की देश को, जानें कबसे थी आस।
रामलला के कार्य को, किया बिना रुके अविराम।
प्रभु को अपने महल पहुचाये, खुशी बिखरी थी चारों धाम।
प्रभु के मानो चरण पखारे निज अश्रु ने किया गंगा का काम।
ह्रदय बस गई गंगा मैया, आँखें बनी कमंडल की धार।
शब्द नहीं निकले तब मुख से, दिल की बात सुन रहे भगवान्।
युग परिवर्तक की देश को, जानें कब से थी आस।
सतयुग आने से पहले धरती पर, युग परिवर्तक आते हैं।
परिवर्तन की इस बेला में वे, अपना धर्म निभाते हैं।
आसान नहीं इतना होता है, परिवर्तन का काम।
मौत को रख आँखों के सामने, हाथों में रखते हैं प्राण।
करना पड़ता है त्याग बहुत, पाने देश का विश्वास।
एक युग परिवर्तक की देश को, जानें कब से थी आस।
रचनाकार- श्रीमती सुनीता बोपचे,गंगेरुआ ,जिला- सिवनी (म प्र)










