
बांसुरी हृदय में बजाई कान्हा ने,
जीवन मेरा धन्य हुआ है,
सूने मन के हर कोने में
प्रेम सुधा का राग बसा है।
मैं भी बनकर गोपी, मीरा,
भक्ति में डूबी जाती हूँ,
तेरे नाम की माला लेकर
हर पल तुझको गाती हूँ।
प्रभु को महसूस किया मैंने
मन की पावन गहराई में,
जैसे मिलती धूप सुबह की
कोमल-सी परछाई में।
तेरी मुरली की धुन सुनकर
हर पीड़ा खो जाती है,
मेरा रोम रोम क्या,
आत्मा मुस्काती है।
हे कान्हा! तेरे चरणों में
मेरा सारा संसार बसा,
तेरी कृपा से ही जीवन
हर दम साकार हुआ।
डॉ रुपाली गर्ग
मुंबई महाराष्ट्र












