
पानी बरसा झम झम झम
नदिया आयी पास पर थोड़ी कम
छोटू जी को सूझी कारस्तानी
पन्ना फाड़ा नाव चली मस्तानी
जल्दी जल्दी नाव चली इधर उधर
पानी का झोंका मचा गया गदर
नदिया में तो बह गई है नाव
अब कैसे पहुंचेंगे हम अपने गांव
सोच रहे थे चलो बनाए बड़ी नाव
दोस्तों संग बैठेंगे बड़े पेड़ की छांव
इतने में मम्मी ने आवाज लगाई
जल्दी आओ बन गई टोस्ट मलाई
छोटू जागे सोच रहे नदिया न्यारी
कहां पहुंची होगी अब नाव हमारी
बचपन होता ही है इतना प्यारा
लगता है पूरा हुआ ख्वाब हमारा
सरोज बाला सोनी
कवयित्री












