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परिणय बंधन

मनुहार पाती ।।
हल्दी है ,चंदन है, और बिखरी पड़ी रोली,है,,,
कलेवा है, हाथों में देखो
अटूट प्रणय बंधन है।

है बहुत नाजुक मिलन
दो दिलों का ये प्यारा प्यारा सा युगल पवित्र प्रेम बंधन है।।

है ये जनम जनम का
कच्चे धागों से बधा
अविरल स्नेह बंधन है,

दो आत्माओं का एकाकार स्वरूप,,
यह अविचल गठबंधन है,,।।

है आमं तृण स्नेही जनों को,
आज मेरे घर आंगन में मौज मस्ती और आनंद है।।

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