
जिंदगी है चार दिन
खुशियों से इसे भर लो
तेरा मेरा के चक्कर में
व्यर्थ की चिंता क्यों करो।
जग में जब आये है
तो जीना भी होगा ,
जैसा बीज बोओगे,
वैसा ही फल पाना भी होगा ।
इच्छाओं पर लगा लो विराम
दुःख के भागी बन जाओगे,
इन्द्रियों को कर लें वश में
सुख अपार पाओगे ।
बदलते वक्त के साथ खुद को बदलें
अपितु पीछे रह जाओगे,
मुश्किलों से ना डरे कभी
मेहनत से मंजिल तभी पाओगे।
खुशनसीब हो मिला
मां बाप का साया है,
बोझ समझ मां बाप को
नसीब अपना खोया है।
प्रिया काम्बोज प्रिया
सहारनपुर उत्तर प्रदेश












