
सैनिक परिवारों की रग रग में,
राष्ट्रभक्ति की धारा बहती है,
देश की रक्षा की खातिर उनमें
मर मिटने की हिम्मत होती है।
हर बच्चा उनका सैनिक होता है,
हर माता-पिता भी सैनिक होता है,
दुश्मन देश से भिड़ने की ख़ातिर,
सीमा पर जाने को आतुर होता है।
ऐसे परिवारों की बलिदानी गौरव,
उनकी बहादुरी की गाथा होती है,
राष्ट्रभक्ति की प्रबल भावना और
समझ उनके दिल दिमाग़ में होती है।
युद्ध विभीषिका से नहीं वे डरते हैं,
भारत में आतंकवाद में जब जीते हैं,
आतंकवाद को समूल नष्ट करने को
सेना से कंधा मिलाकर सदा खड़े हैं।
आदित्य देश की रक्षा करने में यदि
शहीद होने का अवसर मिलता है,
वे अपना हौसला बुलन्द रखते हैं,
लिपट तिरंगे में आने को आतुर हैं।
डा० कर्नल आदिशंकर मिश्र
‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’
‘विद्यासागर’, लखनऊ












