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नारी क्यों हारी


नारी की जब सब जन पूजा करते,
बता क्यों धरा पर असुरक्षित नारी।

धरा पर इक्कीसवीं सदी चल रही,
पीड़ित क्यों हैं नारी आज भी भारी।

वेद पुराण भी नारी की गाथा गातें,
नारी क्यों पीड़ित करे जनता सारी।

नीयत क्यों डोलती है बुजदिलों की,
घर से जब भी निकलें नारी बेचारी।

कन्याओं के पग से घर होता पावन,
फिर क्यों कुकर्म करते बलात्कारी।

नारी ही तो होती जग में जगजननी,
लें जन्म जब उसके गले मारें आरी।

बन्दे नारी से ही होता जग में जीवन,
बता दें अपनों से ही नारी क्यों हारी।

नारी हर पल करती रहती है सेवा,
दमन करें सब करते फतवा जारी।

सुनील कुमार खुराना
नकुड़ सहारनपुर
उत्तर प्रदेश भारत

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