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मन तो बना

हसे खेले ऐसा सुंदर चमन तो बना।
दिल खोलकर उड़े ऐसा गगन तो बना।।
बहुत दिन हुए मीत तुझ से हमें बिछड़े हुए,
मनोहर फिर से मिलन का मन तो बना।।

क्यों रहता है मीतवा तू इतना तना।
मेने तो किया है तुझ से प्रेम घना।।
तोड़ दुनियां के सारे रस्मों रिवाज,
मनोहर फिर से मिलन का मन तो बना।।

इस जीवन की कोई मंजिल तो बना।
आजा प्रिय तू तोड़ कर अपनी अना।।
बिना मिले हम फना हो अच्छा नहीं,
मनोहर फिर से मिलन का मन तो बना।।

गीतकार मनोहरसिंह चौहान मधुकर

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