
“ब्रह्म शब्द से लोक स्वर तक”
यह संगोष्ठी संत कवि कबीरदास जी एवं जनकवि बाबा नागार्जुन की जयंती के पावन अवसर पर आयोजित की गई।
कार्यक्रम का शुभारंभ कवयित्री सुरभि शुक्ला की मधुर सरस्वती वंदना से हुआ। मुख्य अतिथि नरेंद्र सिंह अतरी गया जी एवं डॉ. संजीदा ख़ानम शाहीन ने दोनों महापुरुषों को नमन करते हुए उनके प्रेरणादायी जीवन और साहित्य पर प्रकाश डाला।
इस साहित्यिक संगोष्ठी में नोएडा की सुप्रसिद्ध कवयित्री अंजना जैन की विशेष उपस्थिति रही। छंद साधक नरेंद्र सिंह, गोष्ठी अध्यक्ष कवयित्री ममता साहू, संयोजक केविन चौहान तथा विशिष्ट अतिथि सावित्री नेताम सहित सभी साहित्यकारों ने कतआत, मुक्तक और शेरो-शायरी के माध्यम से अंजना जैन का हार्दिक स्वागत किया।
मीना कुमारी परिहार और रमेश चंद्रा की ग़ज़लों ने महफ़िल में समाँ बाँध दिया। देश के विभिन्न प्रांतों से जुड़े रचनाकारों ने वातावरण को शायराना रंग से सराबोर कर दिया। डॉ. कंचन योगेंद्र अग्रवाल, डॉ. कुसुम रानी सिंघल, ईशु कुमार सिंह, उपदेश एवं हेमिन नेताम की सारगर्भित समीक्षाओं ने कार्यक्रम में नई ऊर्जा का संचार किया।
अंत में गोष्ठी अध्यक्ष ममता साहू और मुख्य अतिथि नरेंद्र सिंह गया जी ने सभी साहित्यकारों का आभार व्यक्त किया। निरंतर ऐसे आयोजनों का आश्वासन देते हुए उन्होंने गोष्ठी के समापन की घोषणा की।













