
कभी पास आना जगाकर तो देखो ,
हम तुम्हीं सखा मुस्कुरा कर तो देखो।
कभी दर्द दिल की वफा यूँ जताते,
अँधेरी डगर को हटाकर तो देखो।
हकीकत छुपाई न परदा सजाते,
खुशी के तराने सुनाकर तो देखो।
कभी रंज दिल को मनाकर हँसाते,
अकीदत शमा को जलाकर तो देखो।
सुरभि है तुम्हारी उसे मत भुलाना ,
उसे आप दिल में बसाकर तो देखो।
डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार












