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गजल

कभी पास आना जगाकर तो देखो ,
हम तुम्हीं सखा मुस्कुरा कर तो देखो।

कभी दर्द दिल की वफा यूँ जताते,
अँधेरी डगर को हटाकर तो देखो।

हकीकत छुपाई न परदा सजाते,
खुशी के तराने सुनाकर तो देखो।

कभी रंज दिल को मनाकर हँसाते,
अकीदत शमा को जलाकर तो देखो।

सुरभि है तुम्हारी उसे मत भुलाना ,
उसे आप दिल में बसाकर तो देखो।


डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार

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