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तालिका – एक अजनबी दास्तां

ज़िंदगी की तालिका में,
कुछ पन्ने ऐसे भी आते हैं,
जहाँ अपने होकर भी लोग,
अजनबी से नज़र आते हैं।

कुछ नाम बड़े करीने से लिखे थे,
जिन्हें दिल ने अपना माना था,
पर समय की बदलती स्याही ने,
हर रिश्ता अनजाना कर डाला था।

कुछ खानों में खुशियाँ दर्ज थीं,
कुछ में दर्द का हिसाब लिखा,
कहीं मुस्कानों का जोड़ मिला,
कहीं आँसुओं का जवाब लिखा।

एक पंक्ति में सपनों की दुनिया,
दूसरी में टूटी उम्मीदें थीं,
कुछ यादें अब भी जीवित हैं,
कुछ यादें बिल्कुल मुरझाई थीं।

अजीब है जीवन की यह तालिका,
हर दिन नया अध्याय बनाती है,
जो कल तक दिल के सबसे करीब था,
आज वही अजनबी कहलाती है।

फिर भी मन हार नहीं मानता,
नई राहों पर बढ़ता जाता है,
क्योंकि हर अजनबी दास्तां के पीछे,
एक नया सबक छिप जाता है।

इसलिए अब शिकायत नहीं,
न किसी से कोई गिला रहा,
ज़िंदगी की इस तालिका में,
हर अजनबी भी कभी अपना रहा।

नेहा कुमारी (खुशी)
शोधार्थी
अखनूर जम्मू कश्मीर

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