
मेरा जन्म तो हुआ हे अर्जुन मामा कंस के कारावास में।
इस से बड़ी क्या दु:ख है अर्जुन मेरे लिए इस संसार में।।
जन्म होते ही छोड़ आया मैं माता पिता को कारावास में।
इस से बड़ी क्या दु:ख है अर्जुन मेरे लिए इस संसार में।।
जब की मैं ही करता धरता हूँ और मैं ही सृष्टि रचता हूँ।
फिर भी अपने जीवन में मैं कितना ही दु:ख सहता हूँ।।
तुम क्या दु:ख सुनाते हो अर्जुन इस दु:ख भरी संसार में।
इस से बड़ी क्या दु:ख है अर्जुन मेरे लिए इस संसार में।।
होते ही जन्म अर्जुन कितने रिश्तों को खोया है संसार में।
अपने ही माता पिता को रोते हुए देखा है मैंने इस संसार में।।
तुम अपनों को यूं देखकर क्यों विचलित हो रहा है अर्जुन इस संसार में।
इस से बड़ी क्या दु:ख है अर्जुन मेरे लिए इस संसार में।।
चन्दे पासवान उर्फ अलबेला जी मधुबनी बिहार से,












