
पितु समान इस दुनिया में,
हमदर्द नहीं हो सकता,
बच्चों की परवरिश हेतु,
वह बोझ सभी सह सकता।
बदलेगी शिक्षा ही जीवन,
यह जानकर कर सुत को ले,
स्कूल हॉस्टल छोड़ने हेतु,
एक पिता ही जा सकता।।
भगवान दास शर्मा “प्रशांत”
शिक्षक सह साहित्यकार
इटावा उत्तर प्रदेश
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