
प्यासी है आत्मा, तन में भारी तपन है,
देखो तो क्षितिज पर, बादलों में आकर्षण है।
हे ईश्वर! बरसा दो पहली धार,
हे दाता! कर दो जीवन की बौछार।
सूखी है धरती, तरस रही हर एक कली,
धूल से भरी पड़ी है नगर की हर एक गली।
पक्षी भी प्यासे हैं, वृक्ष भी उदास हैं,
सबकी आँखों में बस एक ही आस है।
कब थमेगी ये धूप की तपती साज़िश?
हे ईश्वर! बरसा दो पहली धार…
प्यासी है आत्मा, तन में भारी तपन है,
देखो तो क्षितिज पर, बादलों में आकर्षण है।
हे ईश्वर! बरसा दो पहली धार,
हे दाता! कर दो जीवन की बौछार।
काले वो बादल जब आकाश पे छाएंगे,
मिट्टी की सोंधी सुगंध हम पाएंगे।
बूंदें जो गिरेंगी इस सूखी धरा पर,
लौट आएगी हरियाली फिर वसुंधरा पर।
स्वीकार कर लो रीना की प्रार्थना,
हे दाता! पूरी कर दो यह कामना
हे ईश्वर! बरसा दो पहली धार,
हे दाता! कर दो जीवन की बौछार।
रीना पटले ,शिक्षिका
शासकीय हाई स्कूल ऐरमा कुरई
जिला सिवनी मध्यप्रदेश











