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शब्द -सीढ़ी

प्रदत्त शब्द —- कृष्ण,मधुर ,शरण,जगत, जिंदगी

रास रचे हैं राधा कान्हा ,पिए प्रेम की भंग।
गोपी सब लगती है राधा , “कृष्ण” लगाते अंग।।

“मधुर “बाँसुरी तान सुनाकर, मोहित करते श्याम।
राधा सँग झूमे ब्रज सारा, गूँजे हरि का नाम।।

“शरण ” कन्हैया की जबआते, मिटते मन के दाह।
राधा संग रंग बरसाते, हरते जग की चाह।।

“जगत” यही संदेश सुनाए, प्रेम बड़ा उपहार ।
द्वेष त्याग कर जो भी जीते, खिले भाव संसार ।।

“ज़िंदगी” एक बहती धारा, मन में है विश्वास।
कर्मपथों पर जो बढ़ता है, पाता सदा विकास।।


डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार

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