
विषय- भीषण गर्मी
विधा- कविता
तप रही है धरती,
उबल रहा है आसमान l
ये नौतपा का समय,
कितना है कठिन ll
इस समय हवा चल रही है ऐसी,
जैसे मानो आग बह रही हो l
पेड़- पौधें झुलस रहे हैं ऐसे,
जैसे मानो आग में जल रहे हो ll
ये नौतपा से डरना कैसे,
समझ से काम लेना है l
स्वयं भी आग से बचना है,
जितना हो सके हमें छाया में रहना है ll
इस समय पारा हैं 45 के पार,
मानो प्रकृति क्रोध में धधक रही है l
पेड़- पौधों को लगाना व बचाना होगा,
नहीं तो हमारी ये लापरवाही बड़ा खतरा बन सकती है ll
लू के झोकें, उमस का है दौर,
सभी जीव- जंतु दौड़े छाया की ओर l
पर नौतपा का ये मौसम है खास,
मानसून की इसी से बनती है आस ll
रचनाकार- नंदकिशोर गौतम
(माध्यमिक शिक्षक)
शास. उच्च. माध्यमिक विद्यालय बकोड़ी,
ब्लॉक कुरई, जिला सिवनी, म. प्र., पिन कोड 480771,












