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पुण्य ख़त्म तो राजा रंक होता है

मकान कितना भी साफ़ सुथरा हो,
धूल गर्दा तो अंदर आ ही जाती है,
हम कितने भी समझदार क्यों न हों,
हमसे भी गलती कभी हो ही जाती है।

जीवन में हर किसी की अहमियत होती है,
अच्छे इंसान सदा मित्र का साथ देते हैं,
और बुरे इंसान जीवन के सबक़ देते हैं,
साथ व सबक़ जीवन में ज़रूरी होते हैं।

जीवन में बहुत से अच्छे मित्र मिल जाते हैं,
पर सच्चे मित्र ही अच्छा जीवन दे पाते हैं,
रिश्ते व मित्रता समझ से निभाये जाते हैं,
इंसान बुरे नहीं, हम उम्मीदें अलग करते हैं।

पानी से अधिक प्यास की क़ीमत होती है,
प्यासे से अधिक पानी की क़ीमत होती है,
मृत्यु से ज़्यादा साँसों की क़ीमत होती है,
जीवन से ज़्यादा मृत्यु भयभीत करती है।

जीवन में रिश्ते और मित्र बहुत बनते हैं,
इनसे भी ज़्यादा विश्वास ज़रूरी होता है,
मित्र या शत्रु, उनके साथ छलकपट न करें,
अपना या ग़ैर, उनकी आत्मा दुःखी न करें।

दूर रहने से न तो रिश्ते टूट जाते हैं,
और न ही नज़दीकी से जुड़ जाते हैं,
एहसास व विश्वास के सूत्र होते हैं,
जो याद से पक्के व मज़बूत होते हैं।

क़र्म और कर्मफल का बहुत महत्व होता है,
इनका पुण्य तो सुख शान्ति के पल देता है,
पर क़र्म का पाप बहुत भयंकर होता है,
आदित्य पुण्य ख़त्म तो राजा रंक होता है।

डॉ कर्नल आदिशंकर मिश्र
‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’
‘विद्यासागर’, लखनऊ ‎

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