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आषाढ़ी बरखा

चित्र आधारित

आषाढी संध्या में
टिम टिम बरसा पानी
मन मेरा खपरैल
ओ मेरी बरखा रानी
टिप टिप बरसा पानी

अंतर तट बंधों को तोड़
टपक रहा जल
अश्रु हो गए हैं सजल
मन हुआ है विकल

धुंध- धुंए के है बादल
छा रहे मनमंडल
घनघोर बरस जाएंगे
छानी छप्पर भी बहाएंगे

ओ आषाढ़ के के पहले बादल
तुम कल कल कल जल लाना
भीगी रातों में आना
मैं भीगुं प्रियतमा को भी भिगाना

राम वल्लभ गुप्त इंदौरी

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