
सेवा,समर्पण और ईश्वर के प्रतीक,
चिकित्सक का हम सम्मान करते है।
वो मानवता की नित मिसाल बनते,
हम राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस मनाते है।।
अपना सुख दुःख भूलकर,
मानव को राह दिखलाते हैं।
मन्नू दिनरात वो सेवा करके,
वो हमारी पीड़ा यूं हर लेते हैं।।
ना ऊँच नीच का यूं भेद करते,
अमीर गरीब की ना बात करते।
सत्य,शांति की राह दिखलाते।
अवाम के वो मसीहा कहलाते।।
श्वेत वस्त्र धारण करते,
कलंक से वो दुर रहते।
बीमारी से यूं राहत देकर,
हमारे दिल में वो बस जाते।।
हत्या को आत्महत्या बता रहे,
दवाई का गोरखधंधा बढ़ा रहे।
इमानदारी से ना ड्यूटी करते,
घर पर निजी एटीएम खोलते।।
आज सेवा को व्यापार बनाते,
दवा कंपनी के एंबेस्डर बनते।
बार बार नई जाँचें लिखकर,
स्वयं अपना मार्केट भी खोलते।।
विश्व शान्ति के रखवाले,
कलंक से वो दुरी बनाले।
सेवा,समर्पण के साथ चले,
ईश्वर की सच्ची पहचान बने।।
मुन्ना राम मेघवाल।
कोलिया,डीडवाना, राजस्थान।












