
धनवंतरि सुश्रुत से चिकित्सक,
की गौरव गाथा गाए सारा देश।
ज्ञान तपस्या सेवा के बल से ही,
मिटे संसार के सारे क्लेश।।
दिव्य वृक्षों की है धरा भारत,
किया ऋषियों ने अनुसन्धान,
वृक्ष वनस्पतियों के गुण खीजे,
दिया पतंजलि ने विश्व को ज्ञान।।
पेड़ चिकित्सक दोनों हितकारी,
दोनों से रखना है यही आस।
घर में तुलसी, बाहर नीम को पूजे,
वृक्ष देव सरीखे रखे विश्वास।।
मानवता का पोषक रहा भारत,
दिया भारत ने जग को ज्ञान।
शल्य चिकित्सा,आयुर्वेद दिया,
पर नहीं किया कभी अभिमान।।
बन देवदूत सम श्वेत वस्त्र में,
हिय रखते सदा सेवा भाव।
कोराना जैसी महामारी में भी,
नहीं रखा कभी हृदय दुर्भाव।।
दुखियों की सदा पीड़ा हरते,
सभी स्वस्थ रहे यही ध्येय।
दिन और रात सेवा को तत्पर,
रहता परहित सेवा उद्देश्य।।
निस्वार्थ भाव परहित सेवा में,
निशदिन तत्पर जो दूत रहते है।
डॉक्टर्स डे पर उन सेवकों को,
श्रद्धा से बारम्बार नमन करते है।।
भगवान दास शर्मा “प्रशांत”
शिक्षक सह साहित्यकार
इटावा उत्तर प्रदेश












