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आओ चलें एक पेड़ लगायें

आओ चलें एक पेड़ लगाएँ,
हरित धरा की ओर कदम बढ़ाएँ।

जिस माँ ने हमें सर्वस्व दिया है,
उस माँ को हर ताप से बचाएँ।

हरियाली की चादर ओढ़ाएँ,
धरती का श्रृंगार बढ़ाएँ।

जल हो गया गंदा-मैला,
हवा भी हो गई दूषित।

स्वार्थ में अंधे इंसानों ने,
कर डाला परिवेश कलुषित।

सूखती नदियाँ, सूखते पोखर,
सूख रहा धरती का कण-कण।

खेत सारे मकान बन गए,
उजड़ गए सुंदर उपवन।

बढ़ा प्रदूषण इस कदर है,
संकट में मानव जीवन है।

आओ मिलकर प्रण करें हम,
प्रदूषण को दूर भगाना है।

पेड़ लगाएँ, जल बचाएँ,
प्रकृति का सम्मान बढ़ाना है।

रहें सुरक्षित नदियाँ, पर्वत,
खेत, वन और सारा जन-जन।

तभी सुरक्षित होगा जग में,
मानव का यह सुंदर जीवन।

पौधा जैसे जैसे बढ़ेगा,
धरती फिर मुस्काएगी।

हरियाली की गोद में मानव,
खुशियों के गीत गाएगी।

रवि भूषण वर्मा
राँची, झारखंड

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