
मेरे बुरे वक्त में जो साथ खड़ा रहा,
आंधियों के बीच भी जो मेरा बना रहा।
जब अपने भी मुझसे दूर होने लगे थे,
तब तू मेरी उम्मीद का दिया जला रहा।।
मेरी खामोशी को जिसने शब्दों सा पढ़ा,
मेरे हर दर्द को जिसने अपना सा गढ़ा।
जब आंखों में नमी थी और दिल उदास था,
तब तूने ही मुझे हौसलों से जोड़ा था।।
गिरते हुए कदमों को जिसने थाम लिया,
टूटते हुए सपनों को फिर नाम दिया।
मेरे संघर्षों में जो हमसफ़र बना रहा,
हर मुश्किल राह में जो साथ चला रहा।।
आज अगर मेरी जिंदगी में सवेरा है,
तो उसमें तेरे विश्वास का बसेरा है।
तेरी वफ़ा का कर्ज़ मैं कभी चुका न सकूँ,
तेरे एहसानों का मोल मैं कभी बता न सकूँ।।
बस इतना सा दिल से इकरार रहा,
तेरे लिए मेरा हर प्यार रहा।
मेरे बुरे वक्त में साथ रहने वाले,
वादा रहा, अच्छा वक्त सिर्फ तेरे लिए रहेगा।।।
तेरी मुस्कान में मेरी खुशियां बसेंगी,
तेरी राहों में मेरी दुआएं सजेंगी।
जब भी सफलता मेरे कदम चूमेगी,
उसकी पहली खुशी तेरे नाम होगी।।
क्योंकि रिश्ते शब्दों से नहीं निभाए जाते,
सच्चे साथ उम्र भर दिल में बसाए जाते।
तूने जो साथ दिया हर हाल में मेरा,
वादा रहा… मेरा हर अच्छा वक्त होगा तेरा।।
नेहा (खुशी) मल्होत्रा
संस्कृत शोधार्थी
अखनूर जम्मू












