
नशा_जीवन की बरबादी
मानव जीवन है अनमोल
क्यों इसे
नशे की आग में झोंक रहा।
मानव जीवन है अनमोल
क्यों इसे
धुंए में उड़ा रहा।
कमाया धन बड़ी मेहनत से
क्यों इसे
व्यसन में गवां रहा।
हर नशा धीमा जहर है
क्यों जीवन
बरबाद कर रहा।
नशा नाम है मौत का
क्यों इसे
निमंत्रण दे रहा।
नशा नाश का मूल है
क्यों इसे
तू न समझ रहा।
डॉ. दीप्ति खरे
मंडला(मध्य प्रदेश)













