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महंगाई का तड़का

एक हास्य कविता

सब्ज़ी वाले ने भाव बताया, सुनकर चक्कर आ गया
टमाटर सोने से महंगा, आलू भी शरमा गया
पत्नी बोली “लौकी ले आओ”
जेब बोली “भाई अब तो मूली भी नहीं आओ”

पेट्रोल पंप पर गया था हवा भरवाने
पंप वाले ने कहा “हवा का भी बिल बनवाने”
ऑटो वाला बोला “मीटर से नहीं चलूंगा”
“UPI करो, कैश में झंझट पलेगा”

बॉस ने कहा “सैलरी बढ़ेगी”
मैंने कहा “कब तक?”
बोले “जब महंगाई घटेगी”
मैंने कहा “सर वो तो रिटायरमेंट के बाद घटेगी”

बिजली का बिल आया तो होश उड़ गया
पंखा चलाया नहीं, फिर भी बिल जड़ गया
पड़ोसी बोला “सोलर लगवा ले”
मैंने कहा “पहले छत तो अपनी हो ले”

महंगाई डायन खाए जात है
और हम ठहाका लगाए जात हैं
क्योंकि रोएंगे तो बिल और बढ़ जाएगा
इसलिए हंसकर ही गुज़ारा चलाए जात हैं

अंतर्राष्ट्रीय हास्य कवि व्यंग्यकार
अमन रंगेला ‘अमन’ सनातनी
सावनेर, नागपुर (महाराष्ट्र)

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