
प्रातकाल में लगती प्यारी, सूर्योदय की लाली।
मदिर समीर सुगंध बिखेरे, प्रकृति हुई मतवाली॥
मतवाली बरखा की बूँदें,भू को हर्षित करती।
प्यासे खेतों की हर मेड़ें,हरियाली को धरती।
मतवाली वन की हर डाली, नव किसलय मुस्काए।
भँवरे गाएँ प्रेम-तराने, मधुरस खूब लुटाए॥
कल-कल करती निर्मल सरिता, जीवन-गीत सुनाती।
मंगलमय संदेश प्रकृति का, जग को पाठ सिखाती॥
मतवाली है प्रीत निराली, मधुर उमंग जगाती,
रूठे मन , बंद कपाटों पर, आशा किरण सजाती।
मतवाली यह जीवन-धारा, प्रेम-सुधा बरसाती।
सत्य, दया, सद्भाव जगाकर, प्यारी राह दिखाती॥
डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार












