
कविता
मुझे ऐसा लगा कि यह मेरे लिए है,
मगर फिर याद आया कि आप भी तो मेरे लिए हैं,
बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं, आपको,
नाम होता रहे दसों दिशाओं में सदा ,
सारी दुनिया कि खुशियां मिले इस राह में
ये गगन,ये धरती तेरे लिए है।
चलती रही लेखनी, लिखने में हों साधना,
अंधेरों को मिटाने में जलती रही है सदा,
यह ज्योति शिक्षा कि यह मशाल तेरे लिए है।।
अशोक सुमन भवानी मंडी (राज.)












