
धर्म-कर्म आधार है, भारत देश महान।
करे चित्त चिंतन सदा, बने विश्व पहचान।
काज सफल करते सभी, प्रथम पूज्य गणराज,
सुमिरन इनका जो करे, करते बुद्धि प्रदान।।
अष्टविनायक देव हैं, गौरी पुत्र गणेश।
शुभदायक वरदान दे ,हरते सबका क्लेश।
महिमा इनकी है बड़ी, रिद्धि सिद्धि के नाथ,
पुत्र लाभ शुभ प्राप्त निज, जग प्रसिद्ध विघ्नेश।।
कर्म रहो करते सदा,गीता का है ज्ञान।
श्रम की पूजा नित्य कर,सफल करो अभियान।
नाम जपो प्रथमेश का,दूर्वा मोदक भोग,
पल में होते हैं मुदित ,श्री गणपति भगवान।।
करते बुद्धि विकास हैं, कर्म सभी निष्काम।
गणनायक करिवर बदन, शोभा ललित ललाम।
याचक बनकर मैं खड़ी, दोनों कर को जोड़,
चाह एक पूरी करो, आ जाओ मम धाम।।
डॉ गीता पांडेय अपराजिता
सलोन रायबरेली उत्तर प्रदेश












