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रफीद —तिरंगा है।

गजल सृजन

काफिया –आन की बंदिश

बहर — 2222—2222—2221—1222=30

जन-जन के मन में बसता भारत की शान तिरंगा है,
वीरों के बलिदानों की गाथा पहचान तिरंगा है।

केसरिया बलिदान सिखाता उजला शांतिप्रतीक बना,
हरियाली उर्वरता का नूतन अरमान तिरंगा है।

गोली खाकर भी जो बढ़ते पीछे कदम न करते हैं,
उनकी हुंकारों का गुंजन ही जयगान तिरंगा है।

माँ की आँखों के आँसू को मन में रखकर लड़ते हैं,
उन रण वीरों के साहस यह अभियान तिरंगा है।

फैल रही है सारे जग मे ‘सुरभि’ मनोहर भारत की,
तन -मन -धन की शक्ति बढ़ाता वह वरदान तिरंगा है।


डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार

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