साहित्यकार सुनील कुमार खुराना की रचना “पल दो पल” को 18 लाख से अधिक पाठकों का अपार स्नेह

नकुड़, सहारनपुर / ऑनलाइन, 10 अगस्त 2026 नकुड़ क्षेत्र के वरिष्ठ शिक्षक एवं अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त साहित्यकार सुनील कुमार खुराना की स्वरचित मौलिक कविता “पल दो पल” पाठकों के बीच अत्यंत लोकप्रिय हो रही है। “वास्तविक रचनायें” पोर्टल पर प्रकाशित इस रचना को सिर्फ छह: माह में अब तक 18,11,826 बार पढ़ा जा चुका है, जो कवि की व्यापक स्वीकार्यता को दर्शाता है। “पल दो पल” कविता जीवन की नश्वरता और मानवीय मूल्यों पर केंद्रित है। कवि ने सरल भाषा में यह संदेश दिया है कि यह जीवन क्षणभंगुर है, अतः हमें इसे प्रेम, सत्य और सेवा से सार्थक बनाना चाहिए। रचना की आरंभिक पंक्तियां “बन्दे प्यार के रंगों में रंग दे यह दुनिया, कुछ दिन का तू अपने घर का मुखिया, तू इस धरा का पल दो पल का नायक” पाठक को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करती हैं।
कविता में “मेरा-मेरी” के संकीर्ण दायरे से बाहर निकलकर सत्कर्म करने, समाज के लिए उपयोगी बनने और अपनी पहचान स्वयं गढ़ने पर बल दिया गया है। “हाथ से लिख अपनी कुछ ऐसी कहानी, उसे सब लोग पढ़े सदा अपनी जुबानी” जैसी पंक्तियां युवाओं को प्रेरणा दे रही हैं। साथ ही कवि ने कटु वचन न बोलने और सबके जीवन में खुशियां फैलाने का आह्वान किया है। “तू सारी धरा पर सत् का दीप जला लें, राहों में सबकी तू सदा फूल खिला लें” यह पंक्ति आज के समय में विशेष प्रासंगिक है। सुनील कुमार खुराना उ०प्रा०वि० बाधी, नकुड़ में प्रधानाध्यापक के पद पर कार्यरत हैं। विगत एक दशक से साहित्य साधना में लीन सुनील कुमार खुराना की 200 से अधिक रचनाएं विभिन्न साझा संकलनों में प्रकाशित हो चुकी हैं। “पिता का मर्म”, “लखनऊ अग्निकांड”, “कीचड़ में कमल सा महकों” और “खुद को जानो” उनकी चर्चित रचनाएं हैं। हाल ही में प्रतिष्ठित संस्था “सुख़न का आशियाँ” ने उन्हें “श्रेष्ठ समीक्षक” एवं “श्रेष्ठ रचनाकार” सम्मान से सम्मानित किया है। 8 अगस्त 2026 को वे “काव्य के पथिक मंच, वाराणसी” में भी आमंत्रित हो चुके हैं। सुनील कुमार खुराना ने इस उपलब्धि का श्रेय पाठकों के प्रेम को देते हुए कहा कि यह सम्मान उन्हें समाज और साहित्य के लिए और अधिक समर्पण से कार्य करने की प्रेरणा देगा। सुनील कुमार खुराना ने यह उपलब्धि सहारनपुर जनपद के लिए समर्पित की है।











