
राहें आसान न होगी, पग-पग पर तूफ़ान मिलेंगे,
जीवन के इस कठिन डगर में, कितने ही अवसान मिलेंगे।
काँटों से डरकर रुक जाना, वीरों का व्यवहार नहीं,
गिरकर फिर से उठना सीखो, हार कभी स्वीकार नहीं।
अंधियारे के बाद सदा ही, उजले से वरदान मिलेंगे,
राहें आसान न होगी, पग-पग पर तूफ़ान मिलेंगे।
धूप तपाएगी माथे को, पाँवों में छाले होंगे,
सपनों की खेती करने को, श्रम के रखवाले होंगे।
संघर्षों की अग्नि में तपकर, जीवन के सम्मान मिलेंगे,
राहें आसान न होगी, पग-पग पर तूफ़ान मिलेंगे।
सच्चे मन से कर्म करो तो, मंज़िल खुद आ जाएगी,
धैर्य और विश्वास संग लेकर, किस्मत भी मुस्काएगी।
हिम्मत मत खोना पथिक, फिर नूतन अभियान मिलेंगे,
राहें आसान न होगी, पग-पग पर तूफ़ान मिलेंगे।
निरंतर ‘सुमन’ बन खिलना, धूप कभी, कभी छाँव मिलेंगे,
राहें आसान न होगी, पग-पग पर तूफ़ान मिलेंगे।
पूर्णिमा सुमन
झारखंड धनबाद












