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मेरी भाषा मेरा अभिमान

मेरी भाषा मेरा अभिमान
मेरे मन को है सिर्फ इतना सा ज्ञान
ऐ मेरी मातृ भाषा है सूर्य समान
जो हर भाषा को देती है सम्मान
वह क्षेत्रिय और विदेशी भाषाओं को
अपनाती है नहीं करती भेदभाव
अ से अज्ञान मिटाकर ऐ ज्ञ से ज्ञान भर देती है
मिठास है इसमें इतनी द्वेष छल को हर लेती है
आज पूरे विश्व में है। इसकी विशेष पहचान
आज की पीढ़ी ने इसे अपना कर
दी देश को मजबूती प्रदान
ऐ अपनत्व की भाषा है ऐसा लगता है
जैसे इसमे पूरा ब्रह्माण्ड समाता है
यह ज्ञान वान बुद्धिजीवियों की महत्वपूर्ण मातृभाषा है

शीलू जौहरी भरूच

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