
शिक्षक तो है राष्ट्रनिर्माता
ज्ञान ज्योत जलाकर,अज्ञान तम मिटाता।
शिक्षक और शिष्य संवाद।
मिटाते सभी जीवन के अवसाद।
शिष्य के मन की बगिया में
ज्ञान बीज रोप कर,
देते हैं रहते संस्कारों की खाद।
सच्चाई का पाठ पढ़ाते
जीवन पथ पर बढ़ना सिखाते।
मन का तमस दूर करते
हटाते मन के अवसाद।
शिक्षक और शिष्य संवाद
बनाते नवराष्ट्र को
जटिलताएं होती सरल ज्यों
होता है दिन रात के बाद ।
शिष्य के मानस की उलझन
सारे भ्रम,संताप।
गुरू के चरणों में झुकते ही
मिलता उजालों का साथ।
कटते सभी अभिशाप।
पांव पखारा गुरू का जैसे
मिटा मन का भी ताप।।
डॉ नवनीता दुबे नूपुर











