
प्रथम पूज्य श्री गणेश जी
की आज स्थापना होनी है,
शुभ मुहूर्त शुभ घड़ी देखकर,
गणपति की पूजा करनी है।
मंगल मूर्ति गणपति बाप्पा,
दस दिन के लिये पधारेंगे,
धरती माँ की गोदी आकर,
हम सबके दुःख दूर करेंगे।
दस दिन सबके घर घर रह,
वो वापस कैलाश सिधारेंगे,
मोदक प्रिय मुद मंगल दाता,
गणपति मौर्या मिल गायेंगे।
माता पार्वती अति खुश होंगी,
महादेव शिव डमरु बजायेंगे,
विघ्न हरेंगे, सबके पाप कटेंगे,
श्री गणेश धरती स्वर्ग बनायेंगे।
ऋद्धि सिद्धि के दाता स्वामी,
एकदंत गणपति की जय हो,
आशीर्वाद दीजिये चतुर्भुज,
मूषकरूढ़ा ज्ञाननिधि जय हो।
आदित्य अर्चना देवाधिदेव है,
सबको सुख – सम्पति दीजै,
दुःखों से दूर रहे यह तन मन,
दया दृष्टि हम सब पर कीजै।
डॉ कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘
‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’
‘विद्यासागर’, लखनऊ











