
जगह-जगह मंडप सजे, भक्त करे गुणगान।
विनय करूंँ कर जोड़ के, करिए बुद्धि प्रदान।
आस लगी प्रभु आपसे, करें दुखों का अंत,
मंगलकारी हो दिवस, बने जगत पहचान।।
गौरी मानस पुत्र हैं, शिवनंदन प्रथमेश।
ज्ञानोदय करते सदा,काटें सारे क्लेश।
जन्मदिवस उनका मना, रहा आज संसार,
मातृ भक्त गणपति बने, टाले बात महेश।।
रिद्धि-सिद्धि दातार है, विघ्न हरण गणराज।
एकदंत महाराज का, सुमिरण कीजै आज।
महिमा बड़ी अपार है,रखते सबका ध्यान,
करते पूरण सर्वदा,गीता का हर काज।।
लक्ष्य साधना पर सदा, रखो मनुज नित ध्यान।
धैर्य हृदय में धारकर,पथ का लें संज्ञान।
रिद्धि-सिद्धि की प्राप्ति हो, पूजें प्रथम गणेश,
करते बुद्धि प्रदान है,इनकी कृपा महान।।
डॉ गीता पांडेय अपराजिता
रायबरेली उत्तर प्रदेश












