
कर्मवीर का ताज सजा,
गौरव हुआ विशाल,
प्रकृति-विज्ञान यात्रा ने
रचा नया कमाल।
डुड़गा की माटी से ज्ञान-ज्योति जगाई,
कबाड़ से जुगाड़ की राह बच्चों को दिखाई।
पुस्तक से विज्ञान निकाल, जीवन से जोड़ दिया,
प्रकृति बचाने का संदेश हर मन में छोड़ दिया।
शिक्षा, स्वच्छता, स्वास्थ्य, संस्कृति का मान,
सेवा और संस्कार बने जीवन की पहचान।
रूढ़ि के तम में चेतना का दीप आपने जलाया,
नारी-शक्ति के सम्मान का संदेश फैलाया।
व्यक्तित्व-विकास, समाजसेवा बने कर्मों के आधार,
शैक्षिक नवाचारों से गूँजा आपका जयकार।
बीस सितंबर का दिवस बना गौरव की पहचान,
जांजगीर-पामगढ़ की धरती को मिला सम्मान।
हरनारायण कुर्रे नहीं,
कर्म हुआ सम्मानित—
“कर्म ही पूजा है।”
रचनाकार
कौशल
मुड़पार चु, पोस्ट रसौटा
विकासखंड पामगढ़, जिला जांजगीर-चांपा
छत्तीसगढ़











