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विषय सच की पतवार

सारी धरा पर सच के रिश्ते,
चलते हैं सदा हंसते-हंसते,
पार करें सच की पतवार।

देख चहुंओर झूठ ही झूठ,
पर अपनों से ही मत रूठ,
बिना सच के नहीं है दरबार।

सदा नहीं रहना है तुझको,
संगति सच्ची करना मुझको,
सच से सदा होगी जयकार।

आंधी भी आए,चाहें तूफान,
सुख-दुख में रहो एक समान,
मत करना तुम कभी अंहकार।

चलते जो सच की राहों पर,
अपनी मंजिल पाते वहीं नर,
ऐसे मानस धरा के अंलकार।

गरीब हो या फिर हो अमीर,
तुम सम रहना,मरे न जमीर,
बोलेंगे सब रब का अवतार।

सुनील कुमार खुराना
नकुड़ सहारनपुर उत्तर प्रदेश

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