
ज़िंदगी की राहों में जब धूप बहुत सताती है,
तब तेरी छाँव बनकर कोई पास चली आती है।
हर खुशी में साथ हँसना, हर ग़म में हाथ थामना,
यही तो है प्रेम—बिन कहे एक-दूजे को समझना।
तू मिला तो लगा, जैसे सफ़र को मंज़िल मिल गई,
सूनी-सी इन राहों को जैसे एक महफ़िल मिल गई।
तेरी आँखों में मैंने अपने सपनों का घर देखा,
तेरे साथ हर मुश्किल को आसान होते देखा।
कभी मैं टूटूँ, तो तू मेरा हौसला बन जाना,
कभी आँखें नम हों, तो मेरी मुस्कान बन जाना।
जब दुनिया की भीड़ में मैं खुद को अकेला पाऊँ,
तू मेरा अपना बनकर बस मेरे पास आ जाना।
न वादों की लंबी सूची, न प्रेम के बड़े अफ़साने,
बस साथ रहे उम्रभर—यही हैं दिल के तराने।
तेरे संग बिताया हर पल अनमोल लगता है,
तेरा होना ही जीवन का सबसे सुंदर मोल लगता है।
समय बदले, मौसम बदले, राहें चाहे बदल जाएँ,
हमारे बीच प्रेम के दीप कभी न बुझ पाएँ।
झुर्रियों में भी तेरी वही मुस्कान मुझे प्यारी हो,
और जीवन की आख़िरी साँस तक तू मेरा जीवनसाथी हो।
क्योंकि प्रेम केवल पास रहने का नाम नहीं,
बल्कि दूरियों में भी दिल के पास रहने का नाम है।
जीवनसाथी वही, जो हाथ थामकर कह राह चाहे जैसी हो, मैं हर कदम तुम्हारे साथ हूँ।
नाम – राजनीता प्रसाद
पता – शकूरपुर आनंदवास, नई दिल्ली 110034













