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शहीदे आज़म भगतसिंह को नमन

इस देश की माटी के लिये सोच लेना,
इस धरती के चरणों की रज चूम लेना,
सुख मिलता है देश के लिये मरने पर,
अपने वतन के लिये मर के देख लेना।
वतन पर सर्वस्व न्योछावर किया था,
उन अमर बलिदानी वीर शहीदों ने,
शहीदे आज़म सरदार भगतसिंह को
जन्मदिन पर मेरा शत्-शत् नमन।

ये शहादत देश के बच्चे बच्चे को
नि:स्वार्थ सेवा का भाव जगाती है,
हर युवा और हर नर नारी देश पर
मर मिटने के लिए सदैव समर्पित है।
शहीदों ने करी क़ुर्बानियाँ,
देश को आज़ादी दिला कर,
वतन पर मर मिटे वीर भारत के,
खुद सरफ़रोशी पर हो निछावर।

ऐ मेरे वतन के लोगों ज़रा
आँख में भर लो पानी,
जो शहीद हुये हैं उनकी,
ज़रा याद करो क़ुर्बानी ।
अब आँखों में पानी फिर भरने की
बारी हम हमवतनो की आयी है,
जान लुटाने की नौबत फिर एक बार
आदित्य हम सबकी बन आयी है।

डॉ कर्नल आदि शंकर मिश्र
‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’
‘विद्यासागर’, लखनऊ

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