
पद्य
समय बड़ा महत्वपूर्ण ये ,
जीवन भी है महत्वपूर्ण ।
दोनों हों एक दूजे से जुदा ,
महत्वाकांक्षा भी चूर्ण ।।
दोनों एक दूजे बिन अधूरे ,
दोनों ही दूजे के आस में ।
दोनों पथ कभी रुके नहीं ,
दोनों दूजे के प्यास में ।।
चहकता जीवन वही है ,
दोनों चले हाथ मिलाकर ।
वही जीवन होत पल्लवित ,
दोनों हॅंसे खिलखिलाकर ।।
तज दे तू जीवन से खेलना ,
तज जीवन का दुरुपयोग ।
समय कभी रुकता नहीं है ,
कर ले तू समय सदुपयोग ।।
जीवन तो यह अमर नहीं ,
समय सदा यह अमर है ।
रुके जीवन चलते चलते ,
समय विराजित समर है ।।
कर ले समय का सदुपयोग ,
कब जीवन गति रुक जाए ।
समय निकले तुमसे आगे ,
जीवन शर्म से झुक जाए ।।
अरुण दिव्यांश
छपरा ( सारण )
बिहार ।













