होनहार विरवान के होत चीकने पात कहावत मेधावी बाल प्रतिभाओं पर एकदम सटीक बैठती है – कल्पकथा परिवार
प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से संचालित राष्ट्र प्रथम, हिन्दी भाषा, सनातन संस्कृति, एवं सद साहित्य हेतु कृत संकल्पित कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार की संवाद प्रभारी ज्योति राघव सिंह ने बताया कि बाल काव्यगोष्ठी होनहार बाल सृजनकारों की उर्वर कल्पना की उड़ान से सुरभित होती रही।
दो चरणों एवं लगभग पांच घंटे तक सहज वातावरण में संपन्न हुई काव्यगोष्ठी का मंच संचालन कल्पकथा परिवार से पवनेश मिश्र ने किया जबकि गुरु वंदना, गणेश वंदना, सरस्वती वंदना को पण्डित अवधेश प्रसाद मिश्र मधुप जी समेत सभी सहभागियों ने समवेत स्वर में गाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
बाल कवियों की ऊर्जा और विद्वान वरिष्ठों लेखनी के लेखनी के शिल्पकारों के कार्यक्रम की अध्यक्षता का पदभार नागपुर महाराष्ट्र की विधायक विद्वान साहित्यकार श्रीमती मेघा अग्रवाल ने सम्हाला जबकि मुख्य अतिथि के रूप में श्री भास्कर सिंह माणिक जी कोंच जालौन उप्र से जुड़े।
कार्यक्रम में बाल कवि कु. पाखी जैन, कु. अनन्या शर्मा, कु. मिहू मनोज अग्रवाल, कु. सारिका, इशित कुमार मनमौजी, कु. प्राची वशिष्ठ, अम्बरीष मिश्र अंबुज, कु. अनुष्का सेमवाल, कु. आकांक्षा दुबे, कु. आयुषी चौधरी, शशांक तिवारी हर्ष, अविनाश सेमवाल, कु. गौरवी जैन, ने बाल रचनाओं से मन मोह लिया।
जबकि दूसरे चरण में पंडित श्री अवधेश प्रसाद मिश्र मधुप, भगवानदास शर्मा प्रशांत, बिनोद कुमार पाण्डेय, भास्कर सिंह माणिक, डॉ श्याम बिहारी मिश्र, मेघा अग्रवाल, डॉ मंजू शकुन खरे, आनंदी नौटियाल अमृता, डॉ. सुधांशु मिश्र, श्रीमती सांद्रा लुटावन गणेश, डॉ अंजू सेमवाल, ज्योति प्यासी, मंगल कुमार जैन, आदि वरिष्ठ सृजनकारों ने मंच को ऊर्जान्वित किया।
आमंत्रित अतिथियों, सहभागी साहित्यकारों, एवं दर्शकों का आभार प्रकट करते हुए कल्पकथा संस्थापक दीदी राधा श्री शर्मा ने बाल प्रतिभाओं को समर्पित कार्यक्रम की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि होनहार विरवान के होत चीकने पात कहावत इन्हीं मेधावी प्रतिभाओं पर सटीक बैठती है, हमें यह दृढ़ विश्वास है कि सनातन के संस्कार, संस्कृति, और समाज में सद्भाव ऐसे होनहार बच्चों के हाथों में सुरक्षित रहेगा।
कार्यक्रम के अंत में श्रीमती ज्योति प्यासी जी द्वारा वन्दे मातरम् स्मरणोत्सव वर्ष में राष्ट्रगीत वन्दे मातरम् का गायन हुआ तत्पश्चात सर्वे भवन्तु सुखिन: शान्ति पाठ के साथ कार्यक्रम को विश्राम दिया गया।












